CURRENT TRENDS IN AYURVEDA

 

समय (Time) बदलने के साथ लोगों की जीवनशैली (Lifestyle) बदलती है; जीवनशैली के बदलने पर लोगों की ज़रूरतें (Needs) बदलती हैं, तथा ज़रूरतें बदलने पर उनको पूरा करने की पद्धतियों (Systems) में भी बदलाव लाना ज़रूरी होता है।

ऐसा नहीं होने पर पद्धतियाँ (Systems) अप्रासंगिक (Irrelevant) हो जाती हैं। यह तथ्य आयुर्वेद पर भी लागू होता है।

यह सच है कि आयुर्वेद प्रकृति के शाश्वत सिद्धांतों (Principles) पर उदित व विकसित हुआ है। किंतु यह भी सच है कि पांच हज़ार वर्ष पूर्व प्रचलित इसकी अनेकों प्रयोग-विधियाँ (Practices) आज के परिप्रेक्ष्य में उतनी कारगर सिद्ध नहीं होतीं तथा उन्हें अद्यतन (Update) करने की बहुत आवश्यकता है।

आज के युग में आयुर्वेद की क्या स्थिति है व इससे सम्बन्धित विभिन्न पक्षों की आवश्यकताएँ व इच्छाएँ (Needs & desires) क्या हैं, आइए देखते हैं – 

I. आयुर्वेद का छात्र (Ayurveda student):
  • मुझे संस्कृत नहीं आती। श्लोक मत बोलिए, वे मेरी समझ से परे हैं। किसी ऐसी भाषा में पढ़ाइए जो मुझे समझ में आ सके!
  • आयुर्वेद के सिद्धांत षड्दर्शन (Philosophy) पर आधारित हैं जो मेरी समझ से परे हैं। मेरी अब तक की सारी पढ़ाई तो बायाॅलॅजी, फिज़िक्स, कैमिस्ट्री इत्यादि मूलभूत विज्ञानों (Basic sciences) में हुई है। जहाँ तक सम्भव हो आयुर्वेद के सिद्धांतों (Principles) व प्रयोग-विधियों (Practices) को इन्हीं मूलभूत विज्ञानों (Basic sciences) के साथ सहसंबन्धित (Correlate) करके पढ़ाईए न, ताकि मुझे भली प्रकार से समझ में आ सके।
  • मेरे काॅलिज में पूरा स्टाॅफ़ नहीं है इसलिए ठीक ढंग से पढ़ाई ही नहीं होती।
  • मेरे काॅलिज के टीचर्स आयुर्वेद को लेकर हमेशा मुझे डिस्करिज करते हैं। जब उन्हें खुद ही आयुर्वेद पर विश्वास नहीं तो हमें कहाँ से विश्वास दिला पाएँगे ।
  • मेरे काॅलिज के कई टीचर्ज़ को खुद ही आयुर्वेद नहीं आता। वे तो अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस में भी 100% ऐलोपैथिक दवाईयाँ ही यूज़ करते हैं।
  • मेरे काॅलिज के अस्पताल में न के बराबर पेशंट्स आते हैं। फिर क्लीनिकल नाॅलिज कहाँ से होगा।

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Complete anti-hypertensive
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II. रोगी (Patient):
  • मेरे पास समय नहीं है, मुझे ज़ल्दी से ज़ल्दी ठीक कर दीजिए! 
  • मैं ज़्यादा दवाई नहीं खा सकता। जहाँ तक हो सके मुझे कम से कम दवाई दीजिएगा ।  
  • मैं जाॅब करता हूँ। बार-बार दवाई नहीं खा सकता। दवा दिन में दो बार ही ले पाऊँगा!
  • ऐसी दवाई दीजिएगा जिसका स्वाद बहुत ज्यादा खराब न हो!
  • परहेज़ कम ही बताईएगा, मैं ज़्यादा परहेज़ नहीं कर सकता!

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Complete anti-dysenteric
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III. समाज (Society):
  • आयुर्वेद की दवाईयाँ बहुत आहिस्ता-आहिस्ता काम करती हैं। आजकल इतना समय नहीं है।
  • आयुर्वेद की दवाईयाँ सिर्फ़ पुरानी बिमारियों में ही फ़ायदा करती हैं, नई बिमारियों में नहीं। इसलिए आमतौर पर हम आयुर्वेद से ईलाज़ तभी लेते हैं जब बीमारी पुरानी हो व ऐलोपैथी से ठीक न हो। 
  • आयुर्वेद के डाॅक्टर्स परहेज़ बहुत बताते हैं जिसे आज की तेज़ ज़िन्दगी में फ़ाॅलो करना पाॅसिबल ही नहीं।
  • आयुर्वेद के कई डाॅक्टर्स आयुर्वैदिक दवा के नाम पे स्टीराॅयड देते हैं। मेरा तो विश्वास ही उठ गया है।
  • आयुर्वेद की दवाईयाँ गर्म होती हैं। और मुझे गर्म दवा सूट नहीं करती।
  • मैंने सुना है आयुर्वेद की दवाईयाँ किडनी और लिवर डैमिज करती हैं। मुझे उनसे बहुत डर लगता है कि कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ।

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Remedy for hypothyroidism
drvasishths.com/thyrin

 
IV. युवा आयुर्वेद चिकित्सक (Young ayurveda doctor):
  • मेरे पास चिकित्सा करने लायक अनुभव नहीं। आयुर्वेद चिकित्सा तो करना चाहता हूँ पर कोई गाईड ही नहीं करता। आयुर्वेद की पुस्तकें भी प्रैक्टीकल नहीं हैं । कम से कम अच्छी पुस्तकें ही लिखिए ताकि कोई सही रास्ता तो मिले।
  • ऐलोपैथी की तरह ही आयुर्वेद में भी हरेक डिज़ीज़ के लिए अलग से ट्रीटमंट प्रोटोकाॅल (Treatment Protocol) होना चाहिए ताकि चिकित्सा करते समय निश्चित दिशानिर्देश तो मिल सकें।
  • आयुर्वेद के सीनियर डाॅक्टर्स अपने इक्स्पीरियंस छुपा कर रखते हैं व पूछने पर बताते नहीं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। आखिर हम इसके लिए और कहाँ जाएँ?

NUBON Tablet
Remedy for osteoporosis
drvasishths.com/nubon


V. आयुर्वेद चिकित्सक (Ayurveda Doctor):
  • आयुर्वेद की ज़्यादातर फार्मा कम्पनियाँ सबस्टैंडर्ड दवाईयाँ बनाती हैं, जिनका रिज़ल्ट ही नहीं होता। 
  • कुछ कम्पनियों की दवाईयाँ तो इफ्फैक्टिव होती हैं पर वे मंहगी होती हैं, जिन्हें मेरे पास आने वाले ज़्यादातर मरीज़ एॅफोर्ड नहीं कर पाते।
  • मेरे पास रोगी अक्सर तब आते हैं जब वे कहीं और ठीक नहीं होते। तब आयुर्वेद की दवा क्या करेगी? आखिर यह दवा है कोई जादू नहीं। फिर भी हम ऐसी स्टेज में भी रिजल्ट दे देते हैं जहाँ ठीक होने की कोई गुञ्जायश ही नहीं रहती। हम और अच्छा कर सकते हैं, अगर रोगी हमारे पास इनीशल स्टेज में आ जाए तो।

OSSIE Tablet
Complete calcium supplement
drvasishths.com/ossie


VI. आयुर्वेद की फार्मा कम्पनियाँ (Ayurveda Pharma Companies):
  • आयुर्वेद की जड़ी-बूटीयाँ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।  इस कारण इनकी कीमत आकाश को छूती जा रही है।
  • ओवरऑल मंहगाई की दर बढ़ने से प्रोडक्शन कॉस्ट, मार्केटिंग काॅस्ट वगैरा का बढ़ना लाज़मी है। उसका असर आयुर्वेद की दवाईयों पर भी पड़ता है। यह हमारे कन्ट्रोल से बाहर है।
  • आयुर्वेद के कई डाॅक्टर्स आयुर्वेद के बजाए ऐलोपैथिक दवाईयाँ इस्तेमाल करते हैं । इससे हमारी आयुर्वेद की फार्मा इन्डस्ट्री को मिलने वाला बिजनेस ऐलोपैथिक फार्मा इन्डस्ट्री को चला जाता है व हमारा टर्न ओवर कम रह जाता है, जबकि खर्चे तो जस के तस रहते हैं। इसका असर तो आखिरकार आयुर्वेद की दवाईयों पर ही पड़ता है।

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Complete remedy for piles
drvasishths.com/pilie


VII. सरकार (Government):
बहुत से आयुर्वेद चिकित्सक आयुर्वेद के बजाए ऐलोपैथी चिकित्सा करते हैं, जो ग़लत है। आयुर्वेद चिकित्सकों को आयुर्वेद के माध्यम से ही चिकित्सा करनी चाहिए ।

GYNORM Tablet
Useful in gynec disorders
drvasishths.com/gynorm


VIII. न्यायपालिका (Judiciary):
सभी चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को अपनी ही चिकित्सा पद्धति के अनुसार चिकित्सा करना उचित होगा।

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Useful in oligomenorrhea
drvasishths.com/mensiflo


IX. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO):
आयुर्वेद सहित विश्व की सभी पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों का भरपूर लाभ उठाना ज़रूरी है। ऐसा करने पर ही विश्व भर के लोगों को आवश्यक चिकित्सका सुविधाएँ दी जा सकती हैं व उनके स्वास्थ्य का संरक्षण व संवर्धन किया जा सकता है। 

INFEX Tablet
Cures bacterial infections
drvasishths.com/infex

(Summary of the Lecture delivered on Dec 20, 2016, at Govt. Ayurvedic Hospital, Jammu)
 
 
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com 

Website : www.drvasishths.com

 

 

MANAGEMENT OF OSTEO-ARTHRITIS

 
 
 
विश्व भर में लगभग 50 करोड़ लोग सन्धिक्षय (Osteoarthritis – OA) से पीड़ित हैं, जिनमें से लगभग आधे लोग जानु-सन्धिक्षय (OA of the knee joint) के हैं।

सन्धिक्षय (OA) में मुख्य विकृति सन्धिगत-तरुणास्थि (Joint cartilage) व उसके नीचे स्थित अस्थि का भञ्जन (Breakdown of the underlying bone) होता है।

रूप (Clinical presentation):

सन्धिक्षय (OA) में सबसे अधिक होने वाले दो रूप हैं – 
  • सन्धि-रुजा (Joint pain)
  • सन्धि-जाड्य (Joint stiffness)

प्रारम्भ में रोगी को श्रम करने पर ही कष्ट महसूस होता है, किन्तु बाद में कष्ट लगातार बना रहता है।

इस रोग में होने वाले कुछ अन्य रूप हैं – 
  • सन्धि-शोथ (Joint swelling)
  • सन्धि की गति में अल्पता (Decreased range of joint motion)
  • पृष्ठ की सन्धियों के विकृत होने पर बाजुओं व जांघों में दौर्बल्य (Weakness) व तोद (Numbness) । 

सन्धिक्षय (OA) से आम तौर पर प्रभावित होने वाली सन्धियाँ – 

  • जानु-सन्धियाँ (Knee joints)
  • अंगुलियों के अग्र-भागों में स्थित सन्धियाँ (Joints near the ends of the fingers)
  • अंगुष्ठ-मूल में स्थित सन्धि (Joint at the base of the thumb)
  • ग्रीवागत सन्धियाँ (IV Joints in the neck)
  • कटिगत सन्धियाँ (IV Joints in the back)
  • नितम्ब सन्धियाँ (Hip joints)।

सन्धिक्षय (OA) से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य – 

  • देह की एक अर्धांग (Joints on one half of the body) की सन्धियाँ दूसरे अर्धांग की अपेक्षा अधिक प्रभावित होती हैं
  • प्रायः रूप पूरी तरह से आने में कई वर्ष लग जाते हैं
  • कष्ट प्रायः सन्धियों तक ही सीमित रहते हैं ।

हेतु व सम्प्राप्ति (Etio-pathogenesis):

सन्धिक्षय (OA) प्रायः भारवाहक सन्धियों (Weight-bearing joints) पर अत्यधिक दबाव पड़ने से होता है। 

इससे सन्धियों में स्वल्प शोथ व सन्धिगत तरुणास्थि (Joint cartilage) का क्षय होकर सन्धिक्षय (OA) होता है।

इसके बाद नीचे स्थित अस्थि-धातु का क्षय (Bone loss) होने लगता है। 

फिर जैसे-जैसे रुजा के कारण प्रभावित अंग की गति में अल्पता आती है, वहाँ की स्थानिक मांस-पेशियों का क्षय (Muscle loss) होने लगता है।   
  
प्रायः स्थूल व्यक्तियों को सन्धिक्षय (OA) होने का भय अधिक रहता है।

 चिकित्सा (Management:

I. शोथहर औषधियाँ (Anti-inflammatory drugs):
  • शल्लकी, एरण्डमूल, जातीफल (Loswel tablet) – यह औषध-योग सन्धि-शोथ कम करने के साथ-साथ मांसगत जाड्यता कम करता है (Muscle relaxant), व सन्धि-रुजा कम (Analgesic) करता है ।

LOSWEL Tablet
  • Anti-inflammatory
  • Analgesic
  • Muscle relaxant 
drvasishths.com/loswel tablet

  • गुग्गलु, रास्ना, दशमूल, मधुयष्टी, हरिद्रा इत्यादि।

II. रुजाहर औषधियाँ (Analgesic drugs):
  • जातीफल, गोदन्ती, वत्सनाभ (Dolid tablet) – सन्धि-रुजा कम करने वाला (Analgesic) यह एक विश्वसनीय औषध-योग है। इसका प्रभाव कुछ मिनटों में ही शुरु हो जाता है व एक घण्टे के भीतर काफी रुजा कम हो जाती है। 

DOLID Tablet
  • Analgesic
drvasishths.com/dolid

  • गुग्गुलु, पारसीक यवानी, पिप्प्लीमूल इत्यादि।

III. तरुणास्थि-वर्धक रसायन (Drugs that promote cartilage synthesis):
  • अश्वगन्धा, शिलाजतु, मण्डूकपर्णी, दुग्धिका, यशद (Cartogen tablet) – समय की कसौटी पर खरा उतरने वाले रसायनों से युक्त यह एक विश्वसनीय औषध-योग है। इससे न केवल सन्धिगत धातुओं का भञ्जन (Breakdown) रुकता है, अपितु भञ्जित सन्धिगत धातुओं का नवनिर्माण (Regeneration of the worn out tissues) भी होता है, जो कई बार एॅक्स-रेज़ में भी दिखाई देता है।

CARTOGEN Tablet
  • Rejuvenator
  • Antioxidant 
drvasishths.com/cartogen

  • आमलकी, विदारिकंद, गोक्षुर, शतावरी, गुडूची, स्वर्ण इत्यादि।

IV. अस्थिवर्धक औषधियाँ (Drugs that promote bone formation):
  • अर्जुन, मण्डूकपर्णी, दुग्धिका (Nubon tablet) – अस्थि-धातुगत कोशिकाओं की संख्या वृद्धि व विकास प्रक्रिया (Osteoblastic activity) को बढ़ा कर अस्थि-धातु का निर्माण कराने वाला यह अति-प्रभावशाली औषध-योग है।

NUBON Tablet
  • Promotes osteoblastic activity
drvasishths.com/nubon

  • मुक्ताशुक्ति, आमलकी, अभ्रक, यशद (Ossie tablet) – अस्थि-धातु के निर्माण के लिए आवश्यक कैल्शियम व अन्य खनिजों की आपूर्ति (Calcium supply) करने वाला यह एक अति-प्रभावशाली औषध-योग है।

OSSIE Tablet

  • Supplies natural calcium
  • Antioxidant
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V. स्थानिक अभ्यंग (Local massage):
  • गंधपूर, देवदारु, सरलस्राव, तैलपर्ण, कर्पूर, पौदीनक, यवनिका, शुण्ठी, निर्गुण्डी, शल्लकी, एरण्डमूल से सिद्ध तैल (Loswel oil) से प्रभावित सन्धि पर मृदु अभ्यंग कराएँ। 

LOSWEL Oil
  • Gives instant relief from pain in the affected joints
drvasishths.com/loswel oil

VI. सामान्य चिकित्सा (General treatment):
  • व्यायाम (Exercise)
  • सन्धि पर पड़ने वाला दबाव कम करने का प्रयास करें (Try to decrease joint stress)
  • स्थौल्यहर औषधियाँ (Anti-obesity drugs) –  गुग्गलु, ब्राह्मी, गण्डीर, पिप्पली, रक्त-मरिच (Thyrin tablet) ।

THYRIN Tablet

  • Stimulates thyroid functions
  • Stimulates metabolic activities
  • Stimulates fat breskdown
drvasishths.com/thyrin
 
 
 
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
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AYURVEDA MANAGEMENT OF CELLULITIS

 


Yet, my deep faith in ayurveda and my gut feeling gave me ample confidence to go ahead with the ayurveda treatment.

‘Okay, I will do as you wish,’ I said looking deep into his eyes and displaying the unflinching faith I had in ayurveda.

I then wrote the following prescription –

1. Tab Infex –  2 tabs, 3 hrly
2. Amrutadi guggulu – 2 tabs 6 hrly
3. Sy. Cardorium Plus – 10 ml bd
4. Ampachan vati – 3 tabs tid

I then asked the patient to report me after 4 days.

After 4 days:

As the patient came after 4 days, there were obvious signs of more than 30 per cent improvement in his condition.

The swelling and bright redness seemed to have significantly reduced. The affected area was relatively less tender. And above all, the patient reported a remarkable reduction in pain and burning sensation. 

To my satisfaction, the patient could walk now with relative ease.

That was amazing! 

30 percent gross improvement in his condition, in 4 days was highly encouraging.

I now modified the treatment as below – 

1. Tab Infex – 2 tabs tid
2. Tab Loswel – 2 tabs tid
3. Cardorium plus 10 ml bd

After 1 week the improvement was remarkable.  70 per cent of the problem seemed to have cured.

The treatment was continued for another 20 days and that cured the disease fully.

End result: Cured
 
 
Dr. Deepa R. Kaushik
Consulting Ayurveda Physician,
Baba Ayurvedic, Ghod Dod Road,
SURAT (Gujarat)
M. 8128991759
 
 
 
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
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RAISED TSH ???

 
 
It’s hypothyroidism (समान-वायुक्षय) !

Don’t start Thyroxine for the rest of the life of patient.

You have a better short-term remedy (1-3 years) in ayurveda to manage it…

THYRIN Tablet
drvasishths.com/thyrin

Dr.Vasishth
M. 9419205439

 

ASTHEX TABLET IN NASAL & CHEST CONGESTION 

Dear Doctors!


I would like to share with you my own experience about the result of Tab Asthex.

Five days ago, on the morning of Monday Dec 12, I suddenly developed cold probably due to exposure to cold weather.

In the next 3-4 hours, I started feeling some other symptoms too. These included sneezing, dry cough, headache (especially in the temporal regions), feeling of pain and cold in the chest, and dyspnoea.

The symptoms were mild initially, however, in a matter of few hours, the intensity of the symptoms increased manifold.

For initial 3 hours, I didn’t take any medication. 

However, thereafter as the cough and dyspnoea worsened, I started the following treatment –

Asthex tablet
2 tabs after every two hours to a maximum of 12 tablets that day. 

Sitopaladi churna
1 tsf, 2 hourly, until late night.

As I woke up next morning, I felt quite fine. 

Dyspnoea was much relieved, and the cough became productive with the expectoration of white frothy sputum. The cold sensation in my chest and the chest pain had disappeared altogether.

Next day (Tuesday, Dec 13), I took three doses of the same two medicines, until night.

I woke up next morning (Wednesday, Dec 14) fresh, energetic, and active. All my problems – sneezing, dry cough, temporal headache, feeling of pain and cold in the chest, and dyspnoea, were no more there. 

9 doses of the Asthex tablet and the Sitopaladi churna taken in two days, had cured my disease completely. 

I was absolutely fit and fine.

I thank Dr. Vasishth for making Asthex tablet – a wonderful combination of effective ayurvedic anti-asthmatic drugs (अन्तमूल + दुग्धिका + अर्क + गण्डीर) for the management of the chest problems especially the asthma and cough.

Dr. Vishal Arora
Ayurved Physician,
“Arogyavedam Ayurved Clinic”
Pathankot (Punjab)
M. 9888707660

डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
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Coleus forskohlii



परिचय (Introduction)

आचार्य चरक (च.चि.12:29-31) ने गण्डीर को गण्डीराद्यरिष्ट के अन्तर्गत वर्णित करते हुए इसे शोथ चिकित्सा में उपयोगी कहा। 

फिर यह संदिग्ध हो गया व बाद के आचार्यों ने लगभग दो सहस्र वर्षों तक इस पर चुप्पी ही साध ली। 

वर्तमान शताब्दी के आरम्भिक वर्षों में, दि आयुर्वैदिक फार्माकोपिया आॅफ इंडिया (The Ayurvedic Pharmacopoeia of India, API: Vol 5, p.33) के माध्यम से इसे संदिग्धता की परिधि से कुछ बाहर निकालते हुए, इसे कोलियस फोर्स्कोलाई (Coleus forskohlii) बाॅटैनिकल नाम दे कर, तथा इसमें निम्न गुण-कर्म-प्रयोग बताते हुए इसे नए सिरे से विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया – 

द्रव्य-गुण-कर्म-प्रयोग

गण्डीर एक सदाबहार, सुगन्धित क्षुप है जो भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, व बिहार जैसे उप-उष्ण-कटिबन्धीय (Sub-tropical) क्षेत्रों में बहुतायत से पाया जाता है ।  हिन्दी व गुजराती में इसे गरमर व गरमल तथा तेलुगु में जीवकामु नामों से पुकारा जाता है। इस में निम्न गुण-कर्म पाए जाते हैं –  

प्रयोज्य अंग:  मूल
रस:  कटु, तिक्त, कषाय
गुण:  रूक्ष, सर, तीक्ष्ण
वीर्य:  उष्ण
विपाक:  कटु
कर्म:  कफहर, वातहर, त्रिदोषहर, व्रणशोधन, विदाही
प्रयोग:  शूल, अर्श, शोथ, गुल्म, कास, कृमि, कुष्ठ, दुष्ट-व्रण, हुतविष, मन्दाग्नि, मूत्रबन्ध, मलबन्ध, उदररोग, प्लीहोदर।
चूर्ण-मात्रा:  3-5 ग्राम

Pharmacology & Therapeutics

सौभाग्यवश, विश्व के कई भागों में गण्डीर (Coleus forskohlii) पर गहन शोध से इसमें अनेकों चिकित्सोपयोगी कर्म (Therapeutically useful actions) पाए गए हैं, जिसका श्रेय इस में विद्यमान मुख्य कार्यकारी तत्व फोर्स्कोलिन (Forskolin) को जाता है। 

ऐसा देखा गया है कि फोर्स्कोलिन (Forskolin) कोषाणु (Cell) के भीतर विद्यमान एॅडिनाइलेट सायक्लेज़ (Adenylate cyclase) नामक पाचक तत्व (Enzyme) को क्रियाशील (Activate) करके सायक्लिक एॅडिनोसीन माॅनोफास्फेट (Cyclic adenosine monophosphate – cAMP) नामक शक्तिवाहक यौगिक (Compound) की उत्पत्ति को बढ़ावा देता है।

सायक्लिक एॅडिनोसीन माॅनोफास्फेट (cAMP) पुनः कोषाणु के भीतर चलने वाले धात्वाग्नि-पाक (Metabolism) में संलग्न विभिन्न प्रकार के पाचक तत्वों (Enzymes) को उत्तेजित करते हुए विभिन्न कोषाणुओं (Cells / tissues / धातुओं) के कार्यों में निम्न रूप से वृद्धि करता है – 

Heart failure (हृद्दौर्बल्य)

गण्डीर तिक्त-रस, वातहर, त्रिदोषहर, शोथहर, कासहर, मूत्रबन्धहर, व उदररोगहर है जो इसके हृद्बल्य (Cardiotonic / Positive inotropic) होने का आभास देते हैं।

लैबिडिन्स्की व अन्यों ने पाया है कि फाॅर्स्कोलिन (Forskolin) हृदय पर हृद्य (Cardiotonic) प्रभाव डालते हुए हृदय की आकुञ्चन-शक्ति (Force of contraction) को बढ़ाने (Positive inotropic) का कार्य करता है। साथ ही यह रक्तवाहिनियों पर विस्फारक (Vasodilator) प्रभाव डालते हुए वृद्ध रक्तचाप / व्यान-बल (High blood pressure) को कम करने (Antihypertensive) का कार्य करता है। – Lebedinsky et al, J. Cardiovasc. Pharmacol. 19(5), 779-89, 1992.

गण्डीर (Coleus forskohlii) के उपरोक्त गुण-कर्मों के आधार पर हमने इसका समावेश हृदय को बल देने वाली कार्डीटोन्ज़ (Carditonz) टैब्लेट में किया है, जिसका उपयोग हृद्दौर्बल्य (Heart failure) की चिकित्सा में किया जाता है। कार्डीटोन्ज़ (Carditonz) टैब्लेट के अन्य घटक हैं – वनपलाण्डु, अर्जुन, अकीक, व ज़हरमोहरा।
CARDITONZ Tablet
The effective cardiac tonic
www.drvasishths.com/carditonz
Bronchial asthma (तमक-श्वासरोग)

गण्डीर कटु-तिक्त-कषाय रस, सर व तीक्ष्ण गुण, उष्ण-वीर्य, कफहर, वातहर, त्रिदोषहर, कासहर है, जो इसके प्राणवह-स्रोतस् पर प्रभावशाली होने का आभास देता है।

क्रायटनर व अन्यों ने पाया कि फाॅर्स्कोलिन (Forskolin) हिस्टामीन-विमुञ्चन (Histamine release) को अवरुध्द करता है व श्वासप्रणलिका-विस्फारण (Bronchodilation) करता है – Kreutner W. et al, Eur. J. Pharmacol. 111 (1):1-8, 1985.

गण्डीर (Coleus forskohlii) के उपरोक्त गुण-कर्मों के आधार पर हमने इसका समावेश प्राणवह-स्रोतस् पर कार्य करने वाली एॅस्थैक्स (Asthex) टैब्लेट में किया है, जिसका उपयोग तमक-श्वासरोग (Bronchial asthma) की चिकित्सा में किया जाता है। एॅस्थैक्स (Asthex) टैब्लेट के अन्य घटक हैं – अन्तमूल, दुग्धिका, व अर्क।
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The reliable anti-asthmatic
www.drvasishths.com/asthex
Mental depression (मनो-अवसाद)

गण्डीर के तीक्ष्ण, उष्ण, कफहर, वातहर, त्रिदोषहर इत्यादि होने से इसके मन व मनोवह-स्रोतस् पर कार्य करने का आभास होता है।

मायडा व अन्यों ने पाया है कि फाॅर्स्कोलिन (Forskolin) चूहों की तैरने की क्रिया को मनो-अवसादहर (Antidepressant)
एॅमीट्रिप्टीलीन के सदृश बढ़ाता है, जो इसके भी मनो-अवसादहर (Antidepressant) होने का आभास देता है – Maeda N. et al, Br. J. Pharmacol. 117(2): 372-76, 1996.

एक अन्य शोध में ओज़ावा व अन्यों ने पाया है कि फाॅर्स्कोलिन (Forskolin) की मनो-अवसादहर (Antidepressant) क्रिया एॅमीट्रिप्टीलीन से अधिक है – Ozawa, H., et al, Biol. Psychiatry 42, 2355, 1997.

गण्डीर (Coleus forskohlii) के उपरोक्त मनो-अवसादहर (Antidepressant) क्रिया के आधार पर हमने इसका समावेश मनोबल्य एॅलिवा (Eleva) टैब्लेट में किया है, जिसका उपयोग मनो-अवसाद (Mental depression) की चिकित्सा में किया जाता है। एॅलिवा (Eleva) टैब्लेट के अन्य घटक हैं – ज्योतिष्मती, अकरकरा व वचा।
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The effective anti-depressant
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Hypo-thyroidism (समानवात-क्षय)

गण्डीर के कटु, तिक्त, कषाय, रूक्ष, सर, तीक्ष्ण, उष्ण, कफहर, वातहर, त्रिदोषहर, अग्निदीपन इत्यादि गुण-कर्मों से इसके समान-वात-उत्तेजक (Thyro-stimulant) होने का आभास होता है।

साॅनियर व अन्यों ने पाया कि फाॅर्स्कोलिन (Forskolin) ग्वानीन न्युक्लियोटायड बाईंडिंग प्रोटीन्स (Guanine nucleotide binding proteins) की मात्रा को बढ़ा कर थायराॅयड हार्मोंस (T3, T4) की उत्पत्ति (Production) व विमुञ्चन (Release) में वृद्धि करता है व बढ़े टी.एॅस.एॅच. (TSH) को कम करता है  – Saunier, B., et al, Biol. Chem. 11-15; 265(32): 19942-46, 1990.

गण्डीर (Coleus forskohlii) के उपरोक्त समानवात-उतेजक (Thyro-stimulant) क्रिया के आधार पर हमने इसका समावेश मनोबल्य थायरिन (Thyrin) टैब्लेट में किया है, जिसका उपयोग समानवात-क्षय  (Hypo-thyroidism) की चिकित्सा में किया जाता है। थायरिन (Thyrin) टैब्लेट के अन्य घटक हैं – गुग्गुलु, ब्राह्मी, पिप्पली, व रक्त-मरिच ।
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निष्कर्ष (Conclusion)

गण्डीर (Coleus forskohlii) बहु-कार्य (Multiple action) वाली एक महत्वपूर्ण औषधि है जिसका निम्न रोगों में उपयोग किया जा सकता है – 

1. हृद्दौर्बल्य – Heart failure
(CARDITONZ tablet)
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2. तमक-श्वासरोग – Bronchial asthma
(ASTHEX tablet)
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3. मनो-अवसाद – Mental depression
(ELEVA tablet)
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4. समान-वात-क्षय – Hypothyroidism
(THYRIN tablet)
www.drvasishths.com/thyrin
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
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AYURVEDA PROMOTION SCHEME (APS)

 

Ayurveda – the time-tested life science from India, has the inherent potential to offer excellent healthcare to the society. 

Yet, because of the lapses that took place over the outgoing many centuries, it lost its role of the main stream medicine and has been relegated to a second position even in the land of its origin.

Happily, realizing the importance of this holistic system of healthcare delivery, people across the world seem to rely more and more on it, for the treatment of their health problems.

But, before accepting the said upgraded role, every ayurveda doctor would need to update their clinical knowledge and skill.

That’s no easy a job, though.

To bring ayurveda back to its place of mainstream medicine, Dr.Vasishth’s AyuRemedies has come up with a unique scheme to promote ayurveda – the AYURVEDA PROMOTION SCHEME (APS).

Aims & Objectives:

The AYURVEDA PROMOTION SCHEME (APS) has the following major aims and objectives –

1. To promote ayurveda for offering quality health care to the present-day society.

2. To update the knowledge of clinical ayurveda as per the present-day needs of the ayurveda doctors across India, at their place of work.

3. To make best use of the talent and energy of the young ayurveda doctors in this regard, and also open up new avenues for enhancing their career.

Modus operandi:

The Ayurveda Promotion Scheme (APS) shall be implemented as below –

1. Applications on the plain paper along with the updated CV and 3 latest passport size photographs, shall be invited from the young ayurveda doctors interested to join the Ayurveda Promotion Scheme (APS) as Ayurveda Promotion Officer (APO).

2. After  scrunitinizing the applications, eligible young ayurveda doctors shall be imparted intensive preliminary training for 3 days, for updating their knowledge of clinical ayurveda practice. The training shall be given in some selected major towns, in all the five zones of India – North, South, East, West, Central. The training shall be free of cost, but the aspirants will manage all the expenses for their travelling, boarding, and lodging, themselves. 

3. At the end of the training, the aspirants shall be required to qualify a test, to be held on the basis of the training imparted during the 3 days.

4. The successful aspirants shall be declared eligible to become – AYURVEDA PROMOTION OFFICER (APO).

5. The APOs will then return to their respective places and start their work given below.

Duties of the Ayurveda Promotion Officer (APO)

1. The APOs will contact the ayurveda doctors in their respective areas, as well as, anywhere in India, willing to update their knowledge of the updated clinical ayurveda, useful for addressing the present day healthcare needs.

2. The APOs will hold meetings as per the convenience of the interested ayurveda doctors and update their knowledge and skills of ayurveda, on the lines of the knowledge they received during the preliminary training.

3. The APO will facilitate in the process of adoption of ayurveda by the interested doctors, including the smooth availability of Dr.Vasishth’s medicines, for which they shall be given appropriate incentives by the Company.

4. The APOs shall be given refresher course of 1 day training after every 3 months, that they will share with the doctors they will be dealing with.

Terms & Conditions:

1. The young ayurveda doctors having BAMS / MD (Ayurveda) / MS (Ayurveda) degrees, only shall be eligible for becoming an APO.

2. The APOs shall have to stay active in all their duties for getting the incentives. Inactive APOs shall be debarred from any incentives from the Company. 

3. The APO shall not be an employee of the Company. The Company shall give them the incentives for the sale they bring to the Company. They could continue with their regular job or private practice.

4. The nature and quantity of the incentives shall be decided by the Company, only. The same may change from time to time as per the Company policies.

5. The APOs found guilty of violating the set rules and regulations, or getting involved in illegal or unfair activities shall cease to exist as the APO, with the immediate effect.

6. Conditions apply on everything stated above.

How to apply:

The young ayurveda doctors interested to become an Ayurveda Promotion Officer (APO) should send their application on the plain paper along with the latest CV and 3 passport sized photographs to the following address – 

Dr.Vasishth
Managing Director,
Dr.Vasishth’s AyuRemedies,
A-16, Doctor House, Paldi, 
AHMEDABAD – 380007, Gujarat
 
 
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com
Website : www.drvasishths.com


 

 

MANAGEMENT OF SNORING

 

 

Snoring results from the relaxation of the uvula and soft palate.

As the  uvula and the soft palate relax, they partially block the airway, resulting in irregular airflow and vibrations.

Causes:

Snoring is usually thought to occur due to any one or more of the following causes:

1. Throat weakness

2. Obesity

3. Obstruction in the nasal passageway

4. Obstructive sleep apnea

5. Sleep deprivation

6. Relaxants such as alcohol or other drugs relaxing throat muscles

7. Sleeping on the back

8. Mispositioned jaw

 
 
Management:

While there is no sure treatment to completely stop snoring, following measures do help in managing this problem, as per the underlying cause(s) – 

1. Anti-infectives in the infection in the nasal passage:
  • Chirayata, Ativisha, Gandhak, Yashad (Infex tab)
  • Guggulu, Guduchi, Dashmula, Manjishtha, Sariva, Nimba, Haridra
  • Tamra, Parad, Malla etc.

2. Anti-allergics in naso-pharyngeal allergy:
  • Shati, Madhuyashti, Zaharmohra, Yashad (Lergex tab)
  • Dugdhika, Kantakari, Haridra, Shirish
  • Tamra, Sphatika etc.

3. Anti-inflammatory drugs in inflammation of the nasopharynx due to infection or allergy:
  • Shallaki, Erandmula, Jatiphal (Loswel tab)
  • Guggulu, Dashmula, Rasna, Haridra etc.

4. Anti-obesity drugs in obesity:
  • Guggulu, Brahmi, Rakta-maricha, Pippali, Gandira  (Thyrin tab)
  • Guggulu, Dashmula, Rasona, Haridra, Shilajatu, etc.

5. Psychotropic drugs in anxiety and depression causing sleep deprivation:
  • Tagar, Brahmi, (Mentocalm tab) in anxiety neurosis
  • Jyotishmati, Akarkara, Vacha, Gandira (Eleva tab) in mental depression.  

6. Stop smoking to manage throat weakness.

7. Avoid relaxants such as alcohol or other drugs relaxing throat muscles, especially before sleep.

8. Avoid seeping on the back.

 

डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com
Website : www.drvasishths.com

 

MANAGEMENT OF ALLERGY

 

एॅलर्जी (Allergy) का नाम सुनते ही मन में आयुर्वेद में तीन रोगों के नाम उभर कर सामने आ जाते हैं – शीतपित्त, उदर्द, व कोठ

और, इसके साथ ही मन में नाम आता है इनकी चिकित्सा में प्रयोग किए जाने वाले सबसे अधिक प्रचलित योग – हरिद्रा खण्ड  का।

हमने हरिद्रा खण्ड का एॅलर्जी में अकेले उपयोग किया और उसके परिणाम देखे।

फिर हमने इसमें रहने वाले सबसे मुख्य घटक हरिद्रा (Curcuma longa) का अकेले प्रयोग किया। 

संयोगवश दोनों के ही परिणाम लगभग समान थे।

सच तो यह है कि कई रोगियों में तो अकेले हरिद्रा चूर्ण के परिणाम हरिद्रा खण्ड से बेहतर मिले। मगर इसके लिए हमें हरिद्रा चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा दिन में दो/तीन बार देना पड़ा। इससे कम मात्रा में देने पर परिणाम सन्तोषजनक नहीं मिलते थे।

इसके बाद हमने शिरीष (Albizzia lebbeck) की छाल का विभिन्न प्रकार की एॅलर्जी में अकेले क्वाथ के रूप में उपयोग किया। परिणाम मिला, किंतु हरिद्रा से कम।

इसके बाद हमने एक के बाद एक, कई औषधियों का अकेले उपयोग किया – 

  • निम्ब (Azadirachta indica)
  • सूतशेखर रस 
  • मधुयष्टी (Glycyrrhiza glabra)
  • कण्टकारी (Solanum xanthocarpum)
  • यवानी (Trachyspermum ammi)
  • दुग्धिका (Euphorbia thymifolia / hirta)
  • गुडूची (Tinospora cordifolia) 
  • ज़हरमोहरा (Serpentine)
  • स्वर्णगैरिक 
  • यशद (Zinc)
  • आमलकी (Emblica officinalis)
  • प्रवालपञ्चामृत रस
  • शटी (Hedychium spicatum) 
  • आरोग्यवर्धिनी
  • अन्तमूल (Tylophora asthmatica)
  • हरीतकी (Terminalia chebula)
  
परिणाम:

आश्चर्य तो यह था कि इन सभी औषधियों के हमें एॅलर्जी में सकारात्मक परिणाम मिले – किसी से कम, किसी से अधिक।

मगर क्रमानुसार सब से अच्छे परिणाम नीचे लिखे ढंग से मिले – 

1. शटी (Hedychium spicatum)
2. मधुयष्टी (Glycyrrhiza glabra)
3. दुग्धिका (Euphorbia thymifolia / hirta)
4. अन्तमूल (Tylophora asthmatica)
5. कण्टकारी (Solanum xanthocarpum)
6. हरिद्रा (Curcuma longa)
7. ज़हरमोहरा (Serpentine)
8. यशद (Zinc)
9. शिरीष (Albizzia lebbeck)

सूतशेखर रस, यवानी (Trachyspermum ammi), व प्रवालपञ्चामृत रस का प्रभाव तात्कालिक व थोड़ी देर के लिए होता था।

गुडूची (Tinospora cordifolia), निम्ब (Azadirachta indica), आमलकी (Emblica officinalis), आरोग्यवर्धिनी व हरीतकी (Terminalia chebula) का प्रभाव लम्बे समय के प्रयोग के बाद मिलता था। 

अनुभूत योग:

इन चिकित्सकीय अनुभवों के बाद हमने निम्न योग बनाए – 

LERGEX Tablet
(लर्जैक्स टैब्लेट)
शटी + मधुयष्टी + ज़हरमोहरा +  यशद को मिला कर हमने LERGEX Tablet (लर्जैक्स टैब्लेट) बनाई जिससे लगभग हर प्रकार की एॅलर्जी  (Nasal, bronchial, skin, food, drug) में अत्युत्तम परिणाम (Excellent results) मिलते हैं।

ASTHEX Tablet
(एॅस्थैक्स टैब्लेट)
अन्तमूल + दुग्धिका + अर्क + गण्डीर को मिला कर हमने ASTHEX Tablet (एॅस्थैक्स टैब्लेट) बनाई, जिससे तमक-श्वास (Bronchial asthma) व एॅलर्जिक कास (Allergic bronchitis) में अत्युत्तम परिणाम (Excellent results) मिलते हैं।

हमें परम आनंद की अनुभूति तब होती है, जब भारत भर से सम्माननीय आयुर्वेद चिकित्सक हमें अपने अनुभव भेज कर हमें बताते हैं कि उन्हें हमारे इन योगों से चिकित्सा में कितनी अधिक सफलता मिलती है।

दो दिन पहले सूरत (गुजरात) की एक प्रसिद्ध आयुर्वेद व पञ्कर्म विशेषज्ञ डाॅ. मीरा सापड़िया जी से LERGEX Tablet के तीव्र त्वक्गत एॅलर्जी (Acute skin allergy) पर उन्हें मिले अत्युत्तम अनुभव को मैंने आपके साथ शेयर किया था।

आज मैं आपसे जम्मू-कश्मीर के एक प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक डाॅ. एॅम.एॅल. गुप्ता जी का अनुभव आप से शेयर कर रहा हूँ । 

डाॅ. गुप्ता जी जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग से हाल ही में वरिष्ठ चिकित्सक के पद से सेवा निवृत्ति के बाद अपने गृहनगर ऊधमपुर में निजी चिकित्सा कार्य करते हुए हुए समाज-सेवा-उन्मुखी सराहनीय कार्य कर रहे हैं।

डाॅ. गुप्ता जी लिखते हैं – 

Many cases of naso-bronchial allergy do come to me and l treat them them on various lines and find good results.

Recently I treated a case who was not responding  to any treatment. 

I treated him with Tab. Lergex 2 tabs. thrice daily, alongwith Liq. Kafeshwari of unjah pharma and anu tail of nagarjuna, for two weeks.

Then he was put on Tab. Lergex 2 tabs bd, for two weeks.

Patient has recoverd completly.

This is for your information and encouragement.

(नेज़ो-ब्राँकियल एॅलर्जी के कई रोगी मेरे पास ईलाज़ के लिए आते हैं व मैं उनका विभिन्न चिकित्सा सूत्रों के आधार पर चिकित्सा करते हुए, उत्तम परिणाम प्राप्त करता हूँ।    

कुछ समय पूर्व मैंने एक रोगी की चिकित्सा की, जिस पर कोई भी चिकित्सा परिणाम नहीं दे रही थी।

मैंने उसकी Lergex Tablet 2 गोली दिन में तीन बार, ऊंझा फार्मा के लिक्विड कफेश्वरी व नागार्जुन के अणु तैल से 2 सप्ताह तक चिकित्सा की।

इसके पश्चात् मैंने उसे दो सप्ताह तक  Tab. Lergex 2 गोली दिन में 2 बार, पर रखा।

रोगी पूरी तरह से स्वस्थ हो गया है।

यह मैं आपकी सूचना व उत्साह बढ़ाने के लिए लिखा रहा हूँ।)

डाॅ. एॅम.एॅल. गुप्ता 
ऊधमपुर, जम्मू व कश्मीर
 
 
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com
Website : www.drvasishths.com

 

 

 

CAREER ENHANCEMENT SCHEME (CES)



Dr.Vasishth’s have launched Career Enhancement Scheme (CES) for the young ayurveda doctors having BAMS / MD (Ayurveda) / MS (Ayurveda) degrees, with the following objectives – 

1. To promote ayurveda by enhancing their knowledge, skills, and proficiency in ayurveda.

2. To enable them earn while they learn and serve.

3. To enable them interact with other doctors and overtime learn from their experiences.

4. To enable them look at life with a wider perspective by feeling the thrill of and facing the newer challenges.

5. To create and enhance leadership quality in them.

6. To fulfill their desire of meeting new people, visiting new places, and gaining new experiences of life.

7. To open up new vistas of additional career by letting them do what they are doing or want to do, thus, maintaining and preserving their freedom.

And, above all they will be helping fellow ayurveda doctors by – 

● Passing them on the acquired new knowledge and efficiency in ayurveda.

● Offering them professional help in the best way possible.

● Help them settle in life in a dignified way.

In addition, this will enable young ayurveda doctors to offer excellent healthcare to the society through ayurveda.

The young ayurveda doctors could do all that by joining our Company as…

AYURVEDA PROMOTION OFFICER (APO)

Interested young ayurveda doctors, please send us your details on my WhatsApp No. 9419205439. 

We will call you back.
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
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Email : drvasishthsunil@gmail.com
Website : www.drvasishths.com
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