STORY OF NUBON

STORY OF NUBON


नव-अस्थि-धातु निर्माण
(NEW BONE FORMATION)



1990 के दशक में हमें मजबूरन नव-अस्थि-धातु के निर्माण पर कार्य करना पड़ा।
कारण, जम्मू-कश्मीर में पहली बार हमने अपने चिकित्सालय में पंचकर्म चिकित्सा आरम्भ की थी व हमारे पास चिकित्सार्थ आने वाले रोगियों में एक मुख्य वर्ग ऐसे रोगियों का था जिनकी समस्या यह थी कि अस्थि-भग्न (Fracture) के पश्चात् सम्पूर्ण अस्थि-सन्धान (Fracture healing) न हो पाया था।

सम्पूर्ण अस्थि-सन्धान (Fracture healing) न हो पाने के अनेकों हेतुओं में से एक मुख्य था – अस्थि-सौषिर्य/अस्थि-क्षय (Osteoporosis)।

हमारे समक्ष दो लक्ष्य थे –

1. प्रभावशाली भग्न-सन्धानक (Fracture healing) औषधियों की खोज व प्रयोग; व


2. अस्थि-धातु का नव-निर्माण करने वाली (New bone formation) प्रभावशाली औषधियों की खोज व प्रयोग ।


मुझे स्मरण हो आया कि कई बरस पहले, ऐसी ही चुनौती मेरे दादा जी के समक्ष आई थी, जब एक हल्के से आघात से मेरी दादी जी की दाईं बाजू की हड्डी (radius) मणिबंध सन्धि से कुछ ऊपर से टूट गई थी तथा स्थानिक हाडवैद्य ने उन्हें स्थानिक चिकित्सा दी थी पर भग्न-सन्धान पूर्णरूपेण न हो पाया व कई माह तक दादी जी कष्ट में रहीं।

फिर कहीं दूर से एक अन्य हाडवैद्य आमन्त्रित किए गए, जिन्होंने मात्र इतना भर किया कि खाने के लिए कुछ औषधियाँ भी दीं। इन औषधियों में दो औषधियाँ हडजोड़ (अस्थि-श्रृंखला) व अर्जुन भी थीं।
मैं उस समय मात्र 10 वर्ष का था तथा इससे अधिक मुझे कुछ याद नहीं।

चिकित्सा का परिणाम आश्चर्यजनक रहा। कुछ माह में दादी जी की बाजू पूरी तरह से स्वस्थ हो गई। भग्न का सम्पूर्ण सन्धान एॅक्स-रे में भी देखा गया ।

हमने उपरोक्त दो लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु औषधियों की एक सूची बनाई –

1. अस्थि-श्रृंखला
2. मुक्ताशुक्ति
3. आमलकी
4. यशद
5. अभ्रक
6. अर्जुन
7. मण्डूकपर्णी


1. अस्थि-श्रृंखला (Cissus quadrangularis) – आयुर्वेद में सर्वोत्तम भग्न-सन्धानक होने के कारण इसका चुनाव किया गया। इसका उपयोग भावप्रकाश व चक्रदत्त ने तो बताया ही था, परन्तु आधुनिक युग में की गई शोध में भी इसे श्रेष्ठतम भग्न-सन्धानक स्वीकार कर लिया गया था। डाॅ. के. एॅन. उडुप्पा व अन्य शोधकर्ताओं ने बताया था कि –
Cissus quadrangularis enhances the development of cortical bone and trabeculae, and facilitates rapid healing of fracture by influencing early regeneration and quick mineralization of bone. (Indian.J.Med. Res. 51: 667, 1963).

2. मुक्ताशुक्ति (Mother of pearl) – अस्थि-धातु-निर्माण के लिए कैल्शियम के एक श्रेष्ठ स्रोत की आवश्यकता थी। हमने प्राकृतिक कैल्शियम के कई स्रोत प्रयोग में लाए । हमें सर्वोत्तम प्रभाव मुक्ता व उसके बाद मुक्ताशुक्ति का मिला। किफायती के साथ-साथ प्रभावशाली होने से मुक्ताशुक्ति का चुनाव किया गया ।

3. आमलकी (Emblica officinalis) – व्रणरोपण व नव-अस्थि-धातु निर्माण में सहायक होने के (आमलकी में मौजूद) विटामिन सी के प्रभाव के कारण इसका चुनाव किया गया ।

4. यशद (Zinc) – रसायन (Antioxidant) व धातुवर्द्धक (Promotes regeneration of tissues) आदि कर्मों के आधार पर इसका चुनाव किया गया ।

5. अभ्रक (Biotite) – रसायन (Antioxidant), धातुवर्द्धक (Promotes regeneration of the tissues), व योगवाही (Bio-availability enhancer) होने के कारण इसका चुनाव किया गया ।

6. अर्जुन (Terminalia arjuna) – संधानीय (Promotes wound healing) होने के कारण इसका चुनाव किया गया । वृन्दमाधव ने लिखा था – ‘भग्नः पिबेत् त्वक् पयसा अर्जुनस्य’ । मेरे शैशवकाल का मेरी दादी जी के अस्थि-भग्न का दृष्ट अनुभव भी इसके चुनाव का आधार बना।

7. मण्डूकपर्णी (Centella asiatica) – इसके व्रणरोपण के प्रभाव की काफी ख्याति सुनी थी। मैंने कई वैद्यों को व्रणरोपण के लिए इसका पुष्कल उपयोग करते देखा था। फिर, भावप्रकाश ने इसके निम्न कर्म बताए थे – शोथहरी (Anti-inflammatory, ?Promotes wound healing), अस्रजित् (Improves microcirculation), व रसायनी (Promotes vitality) । इन सभी कर्मों के आधार पर चुनाव किया गया।

परिणाम:
हमें निम्न रीति से अति-उत्साहवर्धक परिणाम मिलने लगे –

1. अस्थि-सन्धान (Fracture healing) तेज़ गति से व सम्पूर्ण होने लगा; व

2. अस्थि-सौषिर्य / अस्थि-क्षय (Osteoporosis) में भी महत्वपूर्ण लाभ मिलने लगा ।

आगे चलकर हमने उपरोक्त औषधियों के दो योग बनाए –

1. OSSIE Tablet
इसमें मुक्ताशुक्ति, आमलकी, अभ्रक, व यशद का समावेश किया गया है । इसका उपयोग हम कैल्शियम की आपूर्ति (Calcium supplementation) व रसायन (Antioxidant) प्रभाव के लिए करते हैं ।


2. NUBON Tablet 
इसमें अस्थि-श्रृंखला, अर्जुन, व मण्डूकपर्णी का समावेश किया गया है। इसका उपयोग हम मुख्य रूप से (1) अस्थि-भग्न की चिकित्सा में भग्न-सन्धानक (Fracture healing), व (2) अस्थि-सौषिर्य (Osteoporosis) की चिकित्सा में अस्थि-धातु के नव-निर्माण (New bone formation) के लिए करते हैं।


डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com

Website : www.drvasishths.com

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