MANAGEMENT OF ACID PEPTIC DISEASES (APD)

  MANAGEMENT OF ACID PEPTIC DISEASES (APD)

(अम्लपित्त / परिणामशूल / अन्नद्रवशूल / विदग्धाजीर्ण)

     1970-80 के दशक के आरम्भिक दिनों में APD (अम्लपित्त / परिणामशूल / अन्नद्रवशूल / विदग्धाजीर्ण) की चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण घटना घटी।

Cimetidine नाम का एक ऐसा अणु (Molecule) आविष्कृत हुआ था, जिससे माना जा रहा था कि आमाशय-गत अत्यम्लता (Hyperacidity) व तज्जन्य अनेकों विकृतियों का समाधान आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के हाथ लग गया है।

Cimetidine की कार्यशैली के सम्बन्ध में माना जा रहा था कि यह आमाशय में उपस्थित H2 receptors को block (आमाशयस्थ समान-वायु का आवरण) करके अपना कार्य सम्पादित करती है ।
इस समाचार से विश्व भर में अम्लपित्त व उससे सम्बंधित व्याधियों से पीड़ित रोगियों में खुशी की लहर दौड़ना स्वाभाविक ही था ।

परंतु, दुर्भाग्यवश यह खुशी स्थायी सिद्ध न हुई।
बहुत शीघ्र विश्व को इस कटु सत्य से दो चार होना पड़ा कि Cimetidine अम्लपित्त व उससे संबंधित रोगों का स्थायी समाधान पेश करने में अक्षम थी।

फिर, अस्सी के दशक में Ranitidine का आगमन हुआ व दावा किया गया कि जो कार्य इससे पूर्ववर्ती Cimetidine न कर सकी वह Ranitidine कर के दिखाएगी।
दुर्भाग्य(दुर्नीति)वश Ranitidine का भी वही हश्र हुआ ।

इसके पश्चात् Famotidine व उसके बाद व्यवहृत इसी वर्ग की अन्य औषधियों का भी वही हाल हुआ।
इसके पश्चात् युग आरम्भ हुआ Proton-pump inhibitors (PPIs) का।

Proton-pump inhibitors (PPIs) के बारे में कहा गया कि –

Proton-pump inhibitors (PPIs) are a group of drugs whose main action is a pronounced and long-lasting reduction of gastric acid production. They are the most potent inhibitors of acid secretion available. This group of drugs followed and largely superseded another group of medications with similar effects, but a different mode of action, called H2-receptor antagonists. PPIs are among the most widely sold drugs in the world, and the first one, omeprazole, is on the World Health Organization’s List of Essential Medicines.”

निश्चित रूप से PPIs अपने पूर्ववर्ती H2-receptor antagonists की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली थे। परन्तु, कटु सत्य तो यह था कि अम्लपित्त व उससे सम्बंधित व्याधियों का समाधान देने में यह औषध-वर्ग (Drug group) भी असफल ही रहा था।

इस असफलता के पश्चात् तो लोग आधुनिक विज्ञान के वैज्ञानिकों व औषध-निर्माण करने वाली कम्पनियों की नीयत पर ही प्रश्नचिन्ह लगाने लगे हैं कि – क्या वे अम्लपित्त व उससे संबंधित रोगों का सचमुच कोई स्थायी समाधान निकालना चाहते भी हैं कि नहीं?

अब प्रश्न उठता है कि इन दशकों में हम ने क्या किया?
इन तीन दशकों में हम लोग भी उपलब्ध संसाधनों के आधार पर Acid Peptic Diseases (अम्लपित्त / परिणामशूल / अन्नद्रवशूल / विदग्धाजीर्ण) की प्रभावशाली चिकित्सा ढूँढ निकालने की जी तोड़ कोशिश किए जा रहे थे।

‘Acid Peptic Diseases (अम्लपित्त / परिणामशूल / अन्नद्रवशूल / विदग्धाजीर्ण) पर कोई औषधि(योग) प्रभावशाली है, इसका मापदण्ड क्या होना चाहिए?’ हम लोगों ने सबसे पहले इस प्रश्न पर चर्चा की ।
जो उत्तर आया वह इस प्रकार था –

– रोगी यथा सम्भव पथ्य (यदा-कदा अपथ्य) पालन करते हुए सामान्य जीवन व्यतीत करे व उसे अम्लपित्त-नाशक औषधियों की आवश्यकता न (यदा-कदा ही) पड़े।


अगला प्रश्न था – आयुर्वेद में APD व उसकी चिकित्सा का विवरण ढूंढेंगे कहाँ?

निम्न निर्णय हुआ –

  • अम्लपित्त;
  • पित्तज शूल, परिणामशूल, अन्नद्रवशूल;
  • अजीर्ण (विदग्धाजीर्ण)
  • पित्तज गुल्म;
  • पैत्तिक ग्रहणी, इत्यादि ।

चिकित्सा-

1. निदान परिवर्जनः यथा सम्भव।
2. संशोधन: यथा संभव वमन / विरेचन ।
3. संशमन:

उपरोक्त व्याधियों / अवस्थाओं में सम्भावित प्रभाव वाली औषधियों की सूची तैयार हुई –

  • शतावरी
  • शुण्ठी
  • आमलकी
  • शटी
  • गुडूची
  • ज़हरमोहरा
  • मुक्ताशुक्ति / वराटिका / शंख / प्रवाल / मुक्ता
  • मधुयष्टी
  • धत्तूरा
  • वासा
  • भृंगराज
  • पटोल
  • अभ्रक
  • निम्बु
  • पौदीनक
  • यवानी
  • स्वर्जिका क्षार
  • निशोथ
  • हरीतकी

और भी कई।
इन सभी को पहले अकेले व बाद में योग निर्मित करके प्रयुक्त किया गया।

परिणाम:

I. दोष-विपरीत (Disease-modifying) चिकित्सा के लिए निम्न औद्भिद औषधियाँ (Herbs) क्रम से, सबसे अधिक प्रभावशाली पाई गईं –

1. शटी
2. मधुयष्टी
3. भृंगराज
4. शतावरी
5. गुडूची
6. आमलकी


II. दोष-विपरीत (Disease-modifying) चिकित्सा के लिए निम्न खनिज औषधियाँ (Minerals ) क्रम से, सबसे अधिक प्रभावशाली पाई गईं –

1. मुक्ताशुक्ति / मुक्ता
2. प्रवाल / शंख
3. अभ्रक


III. व्याधि-विपरीत (Palliative) चिकित्सा के लिए निम्न औषधियाँ प्रभावशाली पाई गईं –

1. पौदीनक
2. यवानी
3. स्वर्जिका क्षार


APD (अम्लपित्त / परिणामशूल / अन्नद्रवशूल / विदग्धाजीर्ण) की चिकित्सा के लिए औषधयोग:
हम ने सब से प्रभावशाली 3 औद्भिद (Herbs) व 1 खनिज (Mineral) औषधियाँ चुनीं –

1. शटी (Hedychium spicatum)
2. मधुयष्टी (Glycyrrhiza glabra)
3. भृंगराज (Eclipta slba)
4. मुक्ताशुक्ति (Mother of pearl)


इस औषध योग का 20 वर्षों से भी अधिक समय तक Acid-peptic diseases (अम्लपित्त / परिणामशूल / अन्नद्रवशूल / विदग्धाजीर्ण) की चिकित्सा में सफल प्रयोग किया गया।
यह योग LOCID Tablet नाम से प्रसिद्ध हुआ ।

मात्रा:
रोग की गम्भीरता व रोगी के बलाबल के आधार पर LOCID Tablet की मात्रा तय करते हैं।

प्राय: 2-2 गोली दिन में 3 बार से शुरुआत करके, लाभ मिलने पर धीरे-धीरे मात्रा कम (taper off) करते हैं।
Severe / acute conditions में 1-1 गोली मुहुर्मुहु (1-2 घंटे पर) दिन में कई (6-8) बार देते हैं।


LOCID अकेले प्रभावशाली है। इसे अन्य औषधियों की support की आवश्यकता नहीं। केवल बताई गई मात्रा में प्रयोग करने की आवश्यकता है ।



डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com

Website : www.drvasishths.com

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