तेज़ी से बढ़ रही है आयुर्वेद की प्रासंगिकता

Relevance of ayurveda is increasing fast 




Tissue degeneration / deficiency diseases (धातुक्षयजन्य रोग)

    वर्तमान युग की मिथ्या-जीवनशैली के परिणाम-स्वरूप एक अन्य रोग-समूह (Group of diseases) जो पिछले कई दशकों से निरन्तर बढ़े जा रहा है, वह है  –  धातुक्षयजन्य रोग (Tissue degeneration / deficiency diseases)।

सामान्य तौर पर धातुक्षयजन्य रोगों (Tissue degeneration / deficiency diseases) का ज़िक्र आने पर सन्धिक्षय / सन्धिवात (Osteoarthritis / Osteoarthrosis / Degenerative joint disease) ही मन में आता है। किंतु सच तो यह है कि यह बड़ी तस्वीर का अत्यन्त क्षुद्र अंश है।

आयुर्वेद में आहार-विहार-आचार-औषध के सम्यक् प्रयोग से _सार धातुओं_ के निर्माण का स्वीकृत सिद्धांत है।
दूसरी ओर, आहार-विहार-आचार-औषध के मिथ्या प्रयोग से धातुक्षयजन्य (Tissue degeneration / deficiency diseases) कई प्रकार के रोगों का भी प्रत्यक्ष व परोक्ष वर्णन है।

सच तो यह है कि मिथ्या आहार-विहार-आचार-औषध एक ओर जहाँ दोषों की दुष्टि (Dysfunction of the neuro-endocrine system, enzymes, immunity) उत्पन्न कर के रोगोत्पत्ति करते हैं, वहीं दूसरी ओर धातुक्षय (Tissue deficiency / degeneration), ओजःक्षय (Low / deficient immunity), व स्रोतोदुष्टि (Abnormalities in the tissue channels) की स्थिति उत्पन्न कर भी रोगोत्पत्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

कैसे? आईए देखते हैं –

1. रस-क्षय से होने वाले रोग –

● Disorders caused by malnutrition
● Diseases caused by fluid and electrolyte imbalance
● Immune deficiency

2. रक्त-क्षय से होने वाले रोग –

● Anemias
● Leucopenia
● Bleeding disorders
● Immune deficiency

3. मांस-क्षय से होने वाले रोग –

● Muscular degeneration
● Muscular dystrophy
● Myopathies

4. मेद-क्षय से होने वाले रोग –

● Hypotriglyceridemia
● Hypocholesterolemia
● Deficiency of fluids in the joints (synovial), peritoneal cavity, pleural cavity, pericardial cavity, vitreous/aqueous humour, etc.

5. अस्थि-क्षय से होने वाले रोग –

● Osteoporosis

6. मज्जा-क्षय से होने वाले रोग –

● Bone marrow depression
● Blood dyscrasias

7. शुक्र-क्षय से होने वाले रोग –

● Male infertility
● Low libido in males

8. आर्तव-क्षय से होने वाले रोग –

● Female Infertility
● Low libido in females

यह मानवता व हम आयुर्वेद चिकित्सकों का सौभाग्य है कि आयुर्वेद में उपरोक्त धातुक्षयजन्य रोगों की चिकित्सा व इनसे रक्षा के लिए सम्यक् आहार-विहार-आचार के साथ-साथ अनेकों सामान्य व विशेष रसायनों की विस्तृत विवेचना की है जिनके आधार पर हम आधुनिक युग में इन लगातार बढ़ते रोगों की चिकित्सा कर सकते हैं।

कुछ मुख्य रसायन हैं –

1. रससार-कारक रसायन –

● शिलाजतु, आमलकी, स्वर्णमाक्षिक, मुक्ताशुक्ति, अभ्रक, यशद (Minovit);
● अश्वगंधा, शिलाजतु, दुग्धिका, मण्डूकपर्णी, यशद (Cartogen); 
● स्वर्ण, रजत, विधारा इत्यादि।

2. रक्तसार-कारक रसायन –

● शिलाजतु, आमलकी, स्वर्णमाक्षिक, मुक्ताशुक्ति, अभ्रक, यशद (Minovit);
● मण्डूर, लौह, गोमूत्र इत्यादि।

3. मांससार-कारक रसायन –

● अश्वगंधा, कपिकच्छु, शिलाजतु, यशद (HiGro);
● अश्वगंधा, शिलाजतु, दुग्धिका, मण्डूकपर्णी, यशद (Cartogen) इत्यादि।

4. मेदःसार-कारक रसायन –

● अश्वगंधा, शिलाजतु, दुग्धिका, मण्डूकपर्णी, यशद (Cartogen);
● शिलाजतु, आमलकी, अभ्रक, यशद (Minovit) इत्यादि।

5. अस्थिसार-कारक रसायन –

● मुक्ताशुक्ति, आमलकी, अभ्रक, यशद (Ossie);
● अस्थिशृंखला, अर्जुन, मण्डूकपर्णी (Nubon);
● प्रवाल, मुक्ता इत्यादि।

6. मज्जासार-कारक रसायन –

● शिलाजतु, आमलकी, अभ्रक, यशद (Minovit);
● गुडूची, रसायन, गोमूत्र, स्वर्ण, रजत, ताम्र , लौह, मञ्जिष्ठा, हरीतकी इत्यादि।

7. शुक्रसार-कारक रसायन –

● पुत्रञ्जीव, कोकीलाक्ष, शिलाजतु, त्रिवंग (Fertie-M);
● शिलाजतु, आमलकी, अभ्रक, यशद (Minovit); अश्वगंधा, कपिकच्छु, गोक्षुर, स्वर्ण इत्यादि।

8. आर्तवसार-कारक रसायन –

● शतावरी, पुत्रञ्जीव, शिलाजतु, त्रिवंग (Fertie-F);
● अशोक, लोध्र, लज्जालु (Gynorm);
● उलटकम्बल, हीराबोल,  घृतकुमारी (Mensiflo) इत्यादि ।

क्रमशः (Continued)….
डाॅ.वसिष्ठ
Dr.Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com

Comments are closed.

There are no products