जीर्ण कास चिकित्सा

MANAGEMENT OF CHRONIC BRONCHITIS


जीर्ण कास (Chronic bronchitis) में मुख्य विकृति प्राणवहस्रोतस् (Lungs) में रहती है, जहाँ वायु (Air) में रहने वाले अनेकों प्रकार के क्षोभक कण (Noxious particles) श्वासनलिकाओं में जीर्ण-शोथ की स्थिति उत्पन्न कर देते हैं।

हेतु (Etiology):

● धूम्रपान (Tobacco smoke);
● वायु (Air) में रहने वाले अनेकों प्रकार के क्षोभक कण (Noxious particles – dust, silica, cadmium etc.);
● सहज कार्श्य (Low birth weight);
● फुफ्फुसगत पुनरावर्तक संक्रमण (Recurrent chest infections – bacterial and viral);
● कुपोषण (Malnutrition); इत्यादि।

चिकित्सा (Management):

I. कफहर / कासहर औषधियाँ (Anti-tussives, Expectorants):

● शटी, मधुयष्टी, ज़हरमोहरा, यशद (Lergex tab);
● कण्टकारी (अवलेह), कर्कटशृंगी (चूर्ण), हरिद्रा (खण्ड), तुलसी (स्वरस), वासा (अवलेह), शिरीष (क्वाथ), श्लेषमातक (लऊक सपिस्ताँ), इत्यादि ।

II. श्वासहर औषधियाँ (Bronchidilators):

● अन्तमूल, दुग्धिका, अर्क, गण्डीर (Asthex tab);
● धत्तूरा (कनकासव) इत्यादि ।

III. शोथहर औषधियाँ (Anti-inflammatory):

● शल्लकी, एरण्डमूल, जातीफल (Loswel tab);
● गुग्गलु, रास्ना, दशमूल, मधुयष्टी इत्यादि।

IV. रसायन / ओजोवर्धक औषधियाँ (Antioxidants):

● शिलाजतु, आमलकी, मुक्ताशुक्ति, स्वर्णमाक्षिक, अभ्रक, यशद (Minovit tab);
● अश्वगंधा, हरीतकी इत्यादि ।

V. आमपाचक औषधियाँ (Liver tonics):

● शुण्ठी, पिप्पली, मरिच का नियमित सेवन कराएँ;
● यकृत् की क्रिया सुधारने के लिए –
भूम्यामलकी, काकमाची, शरपुंखा (Livie tab) का प्रयोग करें;
● स्थौल्य होने पर मेदो-धातु का पाचन करने के लिए – गुग्गलु, ब्राह्मी, गण्डीर, पिप्पली, रक्तमरिच (Thyrin tab) का प्रयोग कराएँ; अथवा कटुकी, गुग्गलु, चित्रक, ताम्र (आरोग्यवर्धिनी) का प्रयोग कराएँ।

VI. मेध्य रसायन औषधियाँ

● मनोऽवसाद की स्थिति में मनोबल्य मेध्य रसायनों का उपयोग करें – ज्योतिष्मती, अकरकरा, वचा, गण्डीर (Eleva tab);
● मनोद्वेग / चिन्ता / विषाद की स्थिति में मनोशामक मेध्य रसायनों का उपयोग करें – तगर, ब्राह्मी (Mentocalm tab); मण्डूकपर्णी, शंखपुष्पी इत्यादि।

VII. आहार-विहार (Lifestyle):

● रोगी को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करें, तथा इस दौरान होने वाले श्वासकष्ट से चिंतित न होने का आश्वासन दें;
● नियंत्रित रीति से हल्का-फुल्का प्राणायाम कराएँ;
● पौष्टिक आहार की सलाह दें;
● रात्रिभोजन सायंकाल में ही लेने की सलाह दें;
● विशेषकर शीतकाल में उष्ण जल पीने की सलाह दें;
● स्थौल्य होने पर उसकी चिकित्सा करें।

VIII. निदान-परिवर्जनम् (Remove the cause):

● धूम्रपान निषेध कराने का हर सम्भव प्रयास कराएँ;
● धुआँ, धूल इत्यादि से भरपूर वातावरण का त्याग कराएँ। 

डाॅ.वसिष्ठ
Dr.Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com

Comments are closed.

There are no products