एॅलर्जी चिकित्सा

MANAGEMENT OF ALLERGY

 

एॅलर्जी (Allergy) का नाम सुनते ही मन में आयुर्वेद में तीन रोगों के नाम उभर कर सामने आ जाते हैं – शीतपित्त, उदर्द, व कोठ

और, इसके साथ ही मन में नाम आता है इनकी चिकित्सा में प्रयोग किए जाने वाले सबसे अधिक प्रचलित योग – हरिद्रा खण्ड  का।

हमने हरिद्रा खण्ड का एॅलर्जी में अकेले उपयोग किया और उसके परिणाम देखे।

फिर हमने इसमें रहने वाले सबसे मुख्य घटक हरिद्रा (Curcuma longa) का अकेले प्रयोग किया। 

संयोगवश दोनों के ही परिणाम लगभग समान थे।

सच तो यह है कि कई रोगियों में तो अकेले हरिद्रा चूर्ण के परिणाम हरिद्रा खण्ड से बेहतर मिले। मगर इसके लिए हमें हरिद्रा चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा दिन में दो/तीन बार देना पड़ा। इससे कम मात्रा में देने पर परिणाम सन्तोषजनक नहीं मिलते थे।

इसके बाद हमने शिरीष (Albizzia lebbeck) की छाल का विभिन्न प्रकार की एॅलर्जी में अकेले क्वाथ के रूप में उपयोग किया। परिणाम मिला, किंतु हरिद्रा से कम।

इसके बाद हमने एक के बाद एक, कई औषधियों का अकेले उपयोग किया – 

  • निम्ब (Azadirachta indica)
  • सूतशेखर रस 
  • मधुयष्टी (Glycyrrhiza glabra)
  • कण्टकारी (Solanum xanthocarpum)
  • यवानी (Trachyspermum ammi)
  • दुग्धिका (Euphorbia thymifolia / hirta)
  • गुडूची (Tinospora cordifolia) 
  • ज़हरमोहरा (Serpentine)
  • स्वर्णगैरिक 
  • यशद (Zinc)
  • आमलकी (Emblica officinalis)
  • प्रवालपञ्चामृत रस
  • शटी (Hedychium spicatum) 
  • आरोग्यवर्धिनी
  • अन्तमूल (Tylophora asthmatica)
  • हरीतकी (Terminalia chebula)
  
परिणाम:

आश्चर्य तो यह था कि इन सभी औषधियों के हमें एॅलर्जी में सकारात्मक परिणाम मिले – किसी से कम, किसी से अधिक।

मगर क्रमानुसार सब से अच्छे परिणाम नीचे लिखे ढंग से मिले – 

1. शटी (Hedychium spicatum)
2. मधुयष्टी (Glycyrrhiza glabra)
3. दुग्धिका (Euphorbia thymifolia / hirta)
4. अन्तमूल (Tylophora asthmatica)
5. कण्टकारी (Solanum xanthocarpum)
6. हरिद्रा (Curcuma longa)
7. ज़हरमोहरा (Serpentine)
8. यशद (Zinc)
9. शिरीष (Albizzia lebbeck)

सूतशेखर रस, यवानी (Trachyspermum ammi), व प्रवालपञ्चामृत रस का प्रभाव तात्कालिक व थोड़ी देर के लिए होता था।

गुडूची (Tinospora cordifolia), निम्ब (Azadirachta indica), आमलकी (Emblica officinalis), आरोग्यवर्धिनी व हरीतकी (Terminalia chebula) का प्रभाव लम्बे समय के प्रयोग के बाद मिलता था। 

अनुभूत योग:

इन चिकित्सकीय अनुभवों के बाद हमने निम्न योग बनाए – 

LERGEX Tablet
(लर्जैक्स टैब्लेट)
शटी + मधुयष्टी + ज़हरमोहरा +  यशद को मिला कर हमने LERGEX Tablet (लर्जैक्स टैब्लेट) बनाई जिससे लगभग हर प्रकार की एॅलर्जी  (Nasal, bronchial, skin, food, drug) में अत्युत्तम परिणाम (Excellent results) मिलते हैं।

ASTHEX Tablet
(एॅस्थैक्स टैब्लेट)
अन्तमूल + दुग्धिका + अर्क + गण्डीर को मिला कर हमने ASTHEX Tablet (एॅस्थैक्स टैब्लेट) बनाई, जिससे तमक-श्वास (Bronchial asthma) व एॅलर्जिक कास (Allergic bronchitis) में अत्युत्तम परिणाम (Excellent results) मिलते हैं।

हमें परम आनंद की अनुभूति तब होती है, जब भारत भर से सम्माननीय आयुर्वेद चिकित्सक हमें अपने अनुभव भेज कर हमें बताते हैं कि उन्हें हमारे इन योगों से चिकित्सा में कितनी अधिक सफलता मिलती है।

दो दिन पहले सूरत (गुजरात) की एक प्रसिद्ध आयुर्वेद व पञ्कर्म विशेषज्ञ डाॅ. मीरा सापड़िया जी से LERGEX Tablet के तीव्र त्वक्गत एॅलर्जी (Acute skin allergy) पर उन्हें मिले अत्युत्तम अनुभव को मैंने आपके साथ शेयर किया था।

आज मैं आपसे जम्मू-कश्मीर के एक प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक डाॅ. एॅम.एॅल. गुप्ता जी का अनुभव आप से शेयर कर रहा हूँ । 

डाॅ. गुप्ता जी जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग से हाल ही में वरिष्ठ चिकित्सक के पद से सेवा निवृत्ति के बाद अपने गृहनगर ऊधमपुर में निजी चिकित्सा कार्य करते हुए हुए समाज-सेवा-उन्मुखी सराहनीय कार्य कर रहे हैं।

डाॅ. गुप्ता जी लिखते हैं – 

Many cases of naso-bronchial allergy do come to me and l treat them them on various lines and find good results.

Recently I treated a case who was not responding  to any treatment. 

I treated him with Tab. Lergex 2 tabs. thrice daily, alongwith Liq. Kafeshwari of unjah pharma and anu tail of nagarjuna, for two weeks.

Then he was put on Tab. Lergex 2 tabs bd, for two weeks.

Patient has recoverd completly.

This is for your information and encouragement.

(नेज़ो-ब्राँकियल एॅलर्जी के कई रोगी मेरे पास ईलाज़ के लिए आते हैं व मैं उनका विभिन्न चिकित्सा सूत्रों के आधार पर चिकित्सा करते हुए, उत्तम परिणाम प्राप्त करता हूँ।    

कुछ समय पूर्व मैंने एक रोगी की चिकित्सा की, जिस पर कोई भी चिकित्सा परिणाम नहीं दे रही थी।

मैंने उसकी Lergex Tablet 2 गोली दिन में तीन बार, ऊंझा फार्मा के लिक्विड कफेश्वरी व नागार्जुन के अणु तैल से 2 सप्ताह तक चिकित्सा की।

इसके पश्चात् मैंने उसे दो सप्ताह तक  Tab. Lergex 2 गोली दिन में 2 बार, पर रखा।

रोगी पूरी तरह से स्वस्थ हो गया है।

यह मैं आपकी सूचना व उत्साह बढ़ाने के लिए लिखा रहा हूँ।)

डाॅ. एॅम.एॅल. गुप्ता 
ऊधमपुर, जम्मू व कश्मीर
 
 
डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com
Website : www.drvasishths.com

 

 

 

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