आयुर्वेद चिकित्सा के सिद्धांत व प्रयोग: 19 ‘नई शिक्षा; नए आयाम’

आयुर्वेद चिकित्सा के सिद्धांत व प्रयोग: 19

‘नई शिक्षा; नए आयाम’


सोमवार, 3 अगस्त 1981 का ऐतिहासिक दिन आ गया । उस दिन हमारी एॅम. डी. (आयुर्वेद) प्रथम वर्ष की कक्षाएँ आरम्भ होने वाली थीं।


रात भर मुझे यही उत्सुकता बनी रही कि अगली प्रातः से मेरे जीवन का एक नवीन अध्याय आरम्भ होने वाला है। मैं निरन्तर इसी कल्पना में विचरता रहा कि स्नातकोत्तर कोर्स का अध्ययन व अध्यापन स्नातक कोर्स से किस प्रकार से भिन्न होने वाला था ।


भोर होने से कहीं पहले ही मैं उठ गया व अपने अन्य साथियों से काफ़ी पहले मैं इन्स्टिच्यूट जाने के लिए तैयार हो कर प्रतीक्षा करने लगा।
फिर लगभग 7.15 बजे 20-21 विद्यार्थियों का सम्पूर्ण बैच, एक साथ ही नागार्जुन हाॅस्टल से इन्स्टिच्यूट जाने के लिए पैदल निकल पड़ा।


भय या चुनौती के समय झुण्ड में एकत्रित हो जाना, मानव (या यूँ कहें कि सभी प्राणियों) का स्वभाव है।
लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय कर हम सभी ने 7.25 बजे इन्स्टिच्यूट के उस तिमञ्जिला विशालकाय भवन में प्रवेश किया जो अपने भीतर माडर्न मैडिसिन के लगभग वे सभी विभाग समेटे हुए था जिनमें हमें पढ़ाया जाने वाला था।


7.30 बजे से एक दो मिनट पहले हम सब अनैटॅमी (Anatomy) विभाग के सीढ़ीदार लैक्चर हाॅल में अपने-अपने स्थानों पर विराजमान हो चुके थे ।
ठीक 7.30 बजे श्वेत एॅपराॅन-धारी, श्याम-वर्ण, मध्यम आयु व शरीर-सौष्ठव वाले, अतिसुन्दर नाक-नक्ष वाले मुस्कुराते हुए एक सज्जन उस मध्यम आकार के हाॅल में प्रविष्ट हुए ।


यह थे हमारे अनैटॅमी के शिक्षक – डाॅ. आर पद्मनाभन ।
डाॅ. पद्मनाभन जी ने सब से पहले तो अटैन्डेन्स ली व फिर आरम्भ हुआ संक्षिप्त परिचय का दौर।
सब से पहले डाॅ. पद्मनाभन जी ने अपना परिचय देते हुए कहा कि वह मूल रूप से तमिलनाडू से हैं, Anatomy में M. Sc. व Ph. D. हैं तथा अनैटॅमी विभाग में रीडर के पद पर कार्यरत हैं ।


उसके पश्चात् सभी विद्यार्थियों ने अपना-अपना संक्षिप्त परिचय दिया, जो इस प्रकार था –


काय-चिकित्सा


Dr. Sunil Vasishth – Jammu (J&K)
Dr. Kuldeep Raj Kohli – Jammu (J&K)
Dr. Shishu Pal Singh – Bijnor (UP)
Dr. Shashi Dhar Trivedi – Varanasi (UP)
Dr. O. N. Dwivedi – Atarra, Banda (UP)
Dr. Kamal Nayan Goel – Delhi
Dr. Pawan Kumar Vats – Yamunanagar (Haryana)



शल्य-शालाक्य


Dr. R. K. S. Parmar – Jhansi (UP)
Dr. Santosh Singh Makkar – Jalaun (Rajasthan)
Dr. J. P. Awasthi – Lucknow (UP)
Dr. (Miss) Mridula Singh – Kolkata (WB)



प्रसूति एवं बालरोग


Dr. (Miss) Kamlesh Grover – Kotdwar (UP)
Dr. (Miss) Shashi Deora – UP
Dr. Y. P. Mishra – Buxar (Bihar)
Dr. K. B. Mohpatra – Bhuvneshwar (Orissa)



द्रव्य गुण


Dr. Vimalasan Pandey – UP
Dr. N. N. Tiwari – Bihar



रस शास्त्र


Dr. Gyanendra Sharma – UP
Dr. Maksudan Singh – Basti (Bihar)



मौलिक सिद्धांत


Dr. Ashok Mishra – UP
Dr. P. K. Malviya – Lucknow (UP)



फिर डाॅ. पद्मनाभन जी ने बताया कि वह अगले एक वर्ष तक मुख्य रूप से Clinical Anatomy पढ़ाएंगे ताकि हमारा दृष्टिकोण Theoretical के बजाय Practical बन सके।


बात मुझे जँच गई। कारण, बी.ए.एम.एस के प्रथम प्रोफेशनल में मैंने गहन डिसैक्शन कर के अनैटॅमी का काफ़ी कुछ ज्ञानोपार्जन कर लिया था तथा अब पुनः उसी प्रकार से डिसैक्शन में समय देना मुझे अनुचित प्रतीत हो रहा था ।


हाँ, अनैटॅमी के प्रयोगात्मक अध्ययन से कुछ अधिक व विशिष्ट मिलने की संभावना अवश्य लगने लगी थी।
एॅम. डी. (आयुर्वेद) का पहला ही इम्प्रैशन मुझ पर बेहद अच्छा पड़ा था। मैं अतिप्रसन्न था।


तत्पश्चात् हम अन्य सभी सम्बंधित विभागों – Physiology, Pathology, Pharmacology एवं Basic Principles – में भी कक्षा के लिए गए ।
हर कक्षा मुख्य रूप से व्यक्ति व विषय परिचय पर ही केंद्रित रही।


एक बात जिसने मुझे सर्वाधिक प्रभावित किया वह थी – हमारे माडर्न विषयों के लगभग सभी शिक्षक इधर-उधर की बातों में समय न गँवा कर सीधे अपने-अपने विषय पर आ गए थे।
दूसरी ओर Basic Principles की कक्षा में इधर-उधर की बातों के सिवा अन्य कुछ भी नहीें था।


मुझे लगा, काश हमारे आयुर्वेद के शिक्षक भी हमारे माडर्न शिक्षकों की भाँति केवल काम की बातें ही करते।

डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com
Website : www.drvasishths.com

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