आमदोषज विचर्चिका चिकित्सा

Management of Allergic Eczema



   देह-धातुओं (Body tissues) के असात्म्य पदार्थों (Allergens) के संपर्क में आने पर वात-दोष (Neuro-endocrine system) क्रियाशील हो उठता है, जो पुनः कफ-दोष / ओजस् (Immune system) को उत्तेजित कर कई प्रकार की अप्राकृत/विकृत वस्तुएँ/भाव (Abnormal substances/factors) की उत्पत्ति करता है।

यही अप्राकृत/विकृत वस्तुएँ/भाव (Abnormal substances/factors) आम-दोष के रूप में व्यवहार करते हुए देह के विभिन्न धातुओं/अवयवों में आमदोषज/असात्म्यज विकार (Allergic disorders) उत्पन्न करते हैं।

इन अप्राकृत/विकृत वस्तुओं/भावों (Abnormal substances/factors) के त्वचा में विकृति उत्पन्न करने से आमदोषज विचर्चिका (Allergic Eczema) पैदा होती है, जिसकी निम्न रीति से चिकित्सा किए जाने पर आशातीत परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है –

I. आमदोषहर / असात्म्यहर औषधियाँ (Anti-allergic / Antihistaminic drugs):

● शटी, मधुयष्टी, ज़हरमोहरा, यशद (Lergex);
● शटी, मधुयष्टी, भृंगराज, मुक्ताशुक्ति (Locid);
● दुग्धिका, अन्तमूल, अर्क, गण्डीर (Asthex);
● मुक्ताशुक्ति, आमलकी, अभ्रक, यशद (Ossie);
● कण्टकारी (अवलेह);
● हरिद्रा (खण्ड);
● शिरीष;
● सूतशेखर रस;
● स्फटिक, स्वर्ण-गैरिक, यवानी इत्यादि।

II. रसायन औषधियाँ (Immuno-modulator drugs):

● अश्वगंधा, शिलाजतु, दुग्धिका, गण्डीर, यशद (Cartogen);
● भूम्यामलकी, काकमाची, शरपुंखा (Livie);
● कटुकी, गुग्गुलु, ताम्र, शिलाजतु (आरोग्यवर्धिनी);
● गुडूची (चूर्ण);
● तुलसी (स्वरस);
● हरीतकी (चूर्ण); इत्यादि।

III. ओजोवर्धक औषधियाँ (Antioxidant drugs):

● शिलाजतु, आमलकी, मुक्ताशुक्ति, स्वर्णमाक्षिक, अभ्रक, यशद (Minovit);
● स्वर्ण (भस्म);
● मुक्ता (पिष्टी);

IV. स्थानीय आमदोषहर / असात्म्यहर औषधियाँ (Topical Anti-allergic / Antihistaminic drugs):

● मञ्जिष्ठा, सारिवा, निम्ब, करञ्ज, हरिद्रा, दारुहरिद्रा, कण्टकारी, मधुयष्टी, गुडूची, मरिच (Dermin oil);
● आरग्वध (पत्र/मज्जा);
● जाति (जात्यादि तैल);

V. यथासम्भव निदान परिवर्जनम् (Avoidance of the cause, if possible)



डाॅ.वसिष्ठ
Dr.Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com

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