अद्भुत औषध-योग:

यकृत्, वृक्क, व धात्वाग्नियों के रोगों में परम लाभकारी

(Unique drug formulation: Effective in liver, kidney, & metabolic disorders)

प्रकृति अपने आप में सम्पूर्ण है। यह समस्या पैदा करने से पहले उसका समाधान तैयार करती है। 

इसने _तीन_ ऐसी औषधियाँ बनाई हैं जो निम्न तीन प्रकार के रोग-समूहों की चिकित्सा में परम लाभकारी हैं- 

  1. यकृत् के रोग (Diseases of the liver) ।
  2. वृक्क / मूत्रवह संस्थान के रोग (Diseases of kidneys and urinary system) ।
  3. धात्वाग्नियों के रोग (Metabolic Disorders) ।

ये तीन औषधियाँ हैं – 
  1. भूम्यामलकी (Phyllanthus niruri)।
  2. काकमाची (Solanum nigrum)।
  3. शरपुंखा (Tephrosia purpurea) ।

औषधीय कर्म (Pharmacological actions)

यह तीनों औषधियाँ संयुक्त रूप से निम्न कर्म करती हैं –

I.यकृत् पर कर्म (Hepatic actions):

  • कामला (Jaundice) / यकृत् शोथ (Hepatitis) पैदा करने वाले विषाणुओं (Viruses) को बढ़ने से रोकती हैं व उनको नष्ट करती हैं।
  • विभिन्न प्रकार के विषों (Toxins) से यकृत् की रक्षा करती हैं (Hepatoprotective)।
  • पाचक पित्त (Bile) के निर्माण (Formation) व स्रवण (Secretion) की विकृतियाँ दूर करती हैं।

II. वृक्क व मूत्रवह संस्थान पर कर्म (Renal actions):

  • मूत्र (Urine) के निर्माण (Formation), स्रवण (Secretion), व मूत्रगत मलों (Urea, Creatinine) के निकास (Excretion) की विकृतियाँ दूर करती हैं।
  • मूत्राश्मरी (Urinary stones) को घोल (Dissolve) कर उनके निकास (Excretion) में सहायता करती हैं।

III. धात्वाग्नियों पर कर्म (Metabolic actions):

  • बढ़ी हुई रक्तगत शर्करा (Blood sugar) को कम करने में सहायता करती हैं।
  • बढ़ी हुई रक्तगत मेदस् (Blood cholesterol & TGL) को कम करने में सहायता करती हैं।
  • बढ़े हुए रक्तगत यूरिक एॅसिड (Uric acid) को कम करने में सहायता करती हैं।
  • बढ़ी हुई T3 व T4 ( Hyperthyroidism) को कम करने में व कम हुए TSH को बढ़ाने में सहायता करती हैं।
  • बढ़े हुए रक्तचाप (Blood pressure) को कम करने में सहायता करती हैं।

चिकित्सकीय प्रयोग (Therapeutic uses)

इन तीनों औषधियों का संयुक्त रूप से निम्न रोगों की चिकित्सा में प्रयोग श्रेयस्कर होता है –

I. यकृत् के रोग (Hepatic disorders):

  • कामला (Jaundice) / विषाणुजन्य यकृत् शोथ (Viral hepatitis – A, B, C)।
  • विषजन्य यकृत् शोथ (Toxic / Drug hepatitis)।
  • पाचक पित्त के रोग (Biliary disorders)।

II. वृक्क व मूत्रवह संस्थान-गतपर रोग (Renal disorders):
  • वृक्क-अक्षमता (Renal failure) व रक्त में मूत्रगत मलों की वृद्धि (Raised blood urea and creatinine)।
  • मूत्राश्मरी (Urinary stones)।

III. धात्वाग्नियों के रोग (Metabolic disorders):
  • मधुमेह (Diabetes)।
  • बढ़ी हुई रक्तगत मेदस् (Raised blood cholesterol & TGL)।
  • बढ़ा हुआ रक्तगत यूरिक एॅसिड (Uric acid) व वातरक्त (Gout)।
  • समान-वृद्धि / अत्यग्नि (Hyperthyroidism)।
  • वृद्ध रक्तचाप (High blood pressure)।

औषध-योग:
भूम्यामलकी + काकमाची + शरपुंखा को सरलता से प्रयोग करने के लिए  उपलब्ध औषध-योग है –

LIVIE Tablet




डाॅ.वसिष्ठ
Dr. Sunil Vasishth
M. + 91-9419205439
Email : drvasishthsunil@gmail.com
Website : www.drvasishths.com

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